जिला अस्पताल शहडोल व्यवस्था होने पर भी नहीं मिल रहा मरीजो को लाभ,
मौके पर गेट पर न स्ट्रेचर मिलती न कर्मचारी ,गंभीर रोगियों व घायलों को ले जाने में अक्सर होती है कठिनाई
(दीपक केवट - 7898803849)
शहडोल।कलेक्टर ललित दाहिमा ने अपनी पत्रकार वार्ता में जिला अस्पताल को आदर्श अस्पताल बनाने की मंशा भले ही जताई हो लेकिन इसके लिए उन्हे शायद लंबी कवायद करनी पड़ेगी। निर्देशों की अनदेखी करने और अव्यवस्थाओं की आदी हो चुकी इस अस्पताल में वांछित सुधार हो पाना कठिन ही प्रतीत हेाता है। जिला अस्पताल परिसर में आज भी अव्यवस्थाओं का आलम है। स्थिति यह है कि यहां गेट पर स्ट्रेचर तक नहीं रहती है कि जिससे गंभीर रोगियों अथवा घायलों को तत्काल लिटा कर ओपीडी तक ले जाया जा सके। रोगियों को कंधे पर अथवा गोद में उठा कर अंदर ले जाना पड़ता है। गेट पर मदद करने अस्पताल के कर्मचारी, वार्ड ब्वाय तक नहीं रहते हैं। परिसर मे अस्पताल के मेनगेट पर ही वाहनों की भीड़ नजर आती है। यहां वाहन पार्किंग के लिए सामने बड़ा शेड बनवाया गया है फिर भी वाहन चालक अस्पताल की ओपीडी के सामने वाहन गेट से सटा कर खड़ा कर देते हैं। इससे मरीेजों को लाने ले जाने में कठिनाई हेाती है। घायल मरीजों को ए बुलेंस अथवा वाहन से उतार कर अंदर ले जाने में असुविधा होती है। सामने स्ट्रेचर भी नहीं मिलती है। कुछ वर्षों पूर्व तक अस्पताल में सामने दो स्ट्रेचर रखी गई थी और कर्मचारी रखे गए थे। लेकिन यह व्यवस्था अब दिखाई नहीं पड़ती। स्ट्रेचर भी टूटी हुई है उसे अन्य लेाग उठा भी नहीं सकते। अस्पताल की व्यवस्था सुधारने एक प्रशासक की कुछ वर्षों पूर्व नियुक्ति हुई थी। लेकिन वे भी व्यवस्था नहीं सुधार पा रहे हैं। यहां पुलिस की चौकी भी है लेकिन पुलिस को व्यवस्था सुधारने के निर्देश नहीं दिये जा रहे हैं। वाहन पार्किंग के लिए सायकिल स्टैण्ड है पर उसका भी पालन नहीं हो पा रहा है।
अस्पताल में फैली हर तरफ गंदगी
अस्पताल में करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य भले ही हो रहें हों लेकिन सड़क पर बहता नाली का पानी बंद नहीं हो पा रहा है। सीएमएचओ कार्यालय तथा प्रशिक्षण केन्द्र की ओर जाने वाला मार्ग आज भी बदहाल है। इस रास्ते पर अस्पताल के शौचालयों तथा नालियों का पानी बहाया जाता है लेकिन न तो नालियों की समुचित व्यवस्था कराई गई और न रास्ते का सुधार कराया गया। गंदे पानी से होकर सैकड़ों लोग आना जाना करते हैं और संक्रमण के शिकार होते हैं। ज्ञातव्य है कि निर्देश के बावजूद अस्पताल में दूषित जल उपचार का संयंत्र नहीं लगाया गया है। नाली का पानी बहने से आने जाने में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आई वार्ड में लगा रहता है कचड़े का अंबार
अस्पताल परिसर स्थित नेत्र चिकित्सा इकाई की ओर तो गंदगी की भरमार है। यहां नल लगे हैं नलो का पानी रास्ते में बहता रहता है। नालियां मलबे से जाम हैं। अगल बगल कचरे का अंबार लगा रहता है। जिससे यहां असुविधा होती है। बताया जाता है कि परिसर में इस ओर यदा-कदा ही झाड़ू लगती है। नई मेटरनिटी वार्ड जो बना है उसके समीप एक नाली का चे बर खुला और टूटा पड़ा है। इधर-उधर से निस्तारी पानी का भाराव हो रहा है। सामने गंदगी विखरी पड़ी रहती है।
