बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति के गैस एवं तेल का सर्वे कर रही कंपनी की गाड़ियां तहसीलदार ने की जप्त

 बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति के गैस एवं तेल का सर्वे कर रही कंपनी की गाड़ियां तहसीलदार ने की जप्त


पूर्व में भी वन विभाग ने वन क्षेत्र में अवैध रूप से बोरिंग करते हुए की थी जप्त जी टी सी कंपनी के वाहन

शहडोल जिला प्राकृतिक संसाधनों भरा हुआ है साथ ही यहां खनिज संपदा ओं की कमी नहीं है जिससे कारण बड़ी-बड़ी कॉलरी तो यहां पहले से ही थी पर गैस एवं तेल के मिलने की संभावना के बाद ओएनजीसी द्वारा क्षेत्र मैं गैस एवं तेल की संभावना हेतु लगातार खोजबीन की जा रही है जिसके लिए नियमतः स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होता है परंतु ओएनजीसी से पेटी पर लिए गए जीटीसी कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी डीएस जियो सर्विसेज को पेटी पर यहां का काम दिया गया कंपनी के नुमाइंदों द्वारा सारे नियमों को ताक में रखकर बगैर स्थानीय प्रशासन की अनुमति के क्षेत्र में खुदाई का काम चालू कर दिया गया जिसकी जानकारी जिले के पत्रकारों को लगने के बाद इसकी जानकारी मुख्य वन संरक्षक वन विभाग को दी गई जिसके बाद 24 फरवरी को वन विभाग की टीम ने अवैध रूप से वन क्षेत्र में उत्खनन करते हुए कंपनी के एक वाहन और उपकरण जप्त किए गए वन विभाग की टीम के पहुंचने के पहले ही कंपनी के लोग बाकी वाहनों को एवं उपकरणों को लेकर वहां से फरार हो गए जिसे बाद में कंपनी द्वारा वन विभाग को गलत जानकारी देकर और थोड़ा सा जुर्माना भरकर छुडा लिया गया जबकि वन विभाग के अधिकारी इस बात को स्वीकार रहे हैं कि यह कार्य नियम विरुद्ध हुआ है और इस काम में लगे सारे वाहनों को जप्त किया जाना चाहिए परंतु ना जाने किस दबाव या लालच में वन विभाग ने मामूली जुर्माना भरकर मात्र जप्त किए एक वाहन को भी छोड़ दिया जबकि अगर नियम विरुद्ध कार्य हुआ है तो उस कार्य में लगे सारे वाहनों को जप्त होना चाहिए है यह गलत था...

इसी कड़ी में आज गोहपारू के असवारी क्षेत्र में इस कंपनी द्वारा बगैर स्थानीय प्रशासन को सूचित किए हुए उत्खनन किया जा रहा था जिस पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति की और जिला प्रशासन को सूचना दी जिसके बाद गोहपारू तहसीलदार मीनाक्षी बंजारे एवं गोहपारू पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर सात वाहन खनन करते हुए पकड़े जिसके कोई दस्तावेज कंपनी लोगों के पास नहीं पाए गए।

*सवाल यह उठता है कि बगैर अनुमति के ना तो वन क्षेत्र से एक डगाल पेड़ की तोड़ी जा सकती है ना ही राजस्व की भूमि पर किसी प्रकार का खनन किया जा सकता है फिर आखिर जीटीसी एवं डीएस जियोसर्विसेज को ऐसा कौन सा वरदान मिला हुआ है कि इन्हें क्षेत्र में काम करने के लिए किसी प्रकार की अनुमति की जरूरत नहीं होती.....?*

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