माफियों के नाम जनप्रतिनिधियों पर हो रही बदलापुर की कार्रवाई शहडोल लोकप्रिय समाजसेवी को बनाया खनन माफिया जबकि नहीं दूर-दूर तक सरोकर

माफियों के नाम जनप्रतिनिधियों पर हो रही बदलापुर की कार्रवाई

शहडोल लोकप्रिय समाजसेवी को बनाया खनन माफिया जबकि नहीं दूर-दूर तक सरोकर 



शहडोल। मप्र के मुख्यमंत्री इन दिनों माफियाओं को लेकर बेहद सख्त है निश्चित रूप से यह बेहद प्रशंसनीय कदम है, लेकिन ऐसा लगता है कि कही न कहीं उनका खूफियायंत्र या तो कमजोर है या फिर पूर्व से प्राप्त है और बदले की कार्रवाई में लिप्त है। हो सकता है कि इसके पीछे प्रशासन में बैठे लोग ही जिम्मेदार निकले जिसका भोपाले से कोई सरोकार न हो ऐसा ही मामला प्रदेश के प्रमुख कोयलांच क्षेत्र में से एक शहडोल जिले में भी देखा जा रहा है। यहां पर पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष और दो बार जिला पंचायत सदस्य रहे जनप्रतिनिधियों पं. किशोरीलाल चतुर्वेदी को ही एक मामले में अवैध कोयला उत्खनन का प्रमुख आरोपी बना दिया गया है। इस मामले में सच्चाई यह है कि जिस अवैध खदान को लेकर जिला पंचायत सदस्य का नाम पुलिस की एफआईआर में जोड़ा गया है वहां पर श्री चतुर्वेदी का कोई भी संबध भी नहीं है, लेकिन ऐसी जनचर्चा है कि शासन-प्रशासन उनके द्वारा बीते विधानसभा चुनाव में कोतमा में सपाक्स की टिकट पर चुनाव लड़ने का खामियाजा भुगता रहा है। अब सच्चाई जो भी हो नहीं पता, लेकिन मौके पर यदि अभी भी किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी को पूरा मामला सौंपा जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

अवैध उत्खनन से नहीें सरोकार

शहडोल जिले में भी इन दिनो माफियाओं के खिलाफ सख्ती की जा रही है पूरे प्रदेश में भू-माफियाओं और खनिज माफियाओं के खिलाफ एक तरह से जंग छिड़ी हुई है। इसी तर्ज पर शहडोल जिले में भी सख्ती बरती जा रही है, लेकिन पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष पं. किशोरीलाल चतुर्वेदी का ही नाम घसीटे जाने व उनके खिलाफ ही पुलिस एफआईआर दजगर्् हो जाने के बाद ऐसी कार्रवाई की निष्पक्षता पर स्वतः ही प्रश्न चिन्ह लग गया है। बटुरा की जिस अवैध खदान को लेकर पं. किशोरीलाल चतुर्वेदी पर कार्रवाई की जा रही है वह हास्यास्पद है। पता चला है कि ट्रंासपोर्ट व्यवसाय से जुड़े पं. किशोरी लाल चतुर्वेदी का अवैध उत्खनन से कोई सारोकार नहीं रहा है। इस बात को लेकर यदि अभी भी ईमानदारी से जांच करा ली जाए तो सारा सच सामने आ जाएगा।

बदले की कार्यवाही का आरोप

जैसी कि जिले भर में जनचर्चा है कि पं. किशोरीलाल चतुर्वेदी एक लोकप्रिय जननेता है सामाजिक व जनसामान्य के बीच सीधे जुड़े और लोकप्रिय होने के कारण कई बार राजीनीतियों की इच्छाएं हो जाती है जिसे पं. किशोरीलाल चतुर्वेदी हर बार पूरी नहीं कर पाते है इसी को लेकर उनके प्रति वैमनस्य का भाव पाले हुये शासन-प्रशासन में बैठे लोग मौके के इंतजार में रहते है। पता चला है कि इस बार भी ऐसा हुआ है जैसी की पूरे क्षेत्र में जनचर्चा है कि भोपाल का हवाला देकर जिला प्रशासन ने उन पर बिना जांच के जबरन मामला बनाकर दोषी बना कर अपराधी करार दे, राजनैतिक हत्या की कोशिश की है। गौरतलब है कि पं. किशोरीलला चतुर्वेदी का लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपने क्षेत्र के अलावा पूरे शहडोल संभाग में अच्छा खासा वर्चस्व रहता है और वह स्थानीय चुनाव में भी अच्छा खासा प्रभाव रखते है। माना जा रहा है कि बीता चुनाव लड़ने से कई लोगो के राजनीति अरमान प्रभावित हुये होगेें। जिन्होने प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह के माफिया विरोधी मुहिम को एक अच्छा मौका समझ उनका नाम भी घसीट दिया।

सरकार पर न लगे बदले का बट्टा

माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही जरूरी है, इसको लेकर पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री के कदम की प्रशंसा भी हो रही है। भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक के चलते प्रदेश के लगभग हर जिले में अरबोें रूपये की जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। कई जगह तो सड़को तक के गलियों में तब्दील कर दिया गया है। इसी तरह पूरे प्रदेश की नदियों का सीना भी छलनी हो रहा है। समय से पहले ही बड़ी-बड़ी नदियां नालो में तब्दील हो रही है। रेत माफिया और गिट्टी मुरूम माफिया भी प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे है। इसी तरह कई जगह अवैध कोयला व छुई खदानो में जहां अधंाधुंध कमाई के चक्कर में न जाने कितनी जान जा चुकी है। वहीं कई जगजह असली अपराधियों पर नकाब डालकर राजनीकि साजिश के तहत बदलापुर की कार्रवाई की जा रही है। पं. किशोरीलाल चचुर्वेदी के खिलाफ ऐसी ही बदले की कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में असंतोष की लहर है, पता है कि बटुरा क्षेत्र के एक फयूट डीलर ने कई समीकरणों को रंग देकर इस कार्रवाई को अंजाम देने की कोशिश की है जो खुद कई तरह के अवैध कारोबार में लिप्त है और अंचल में अपना प्रभाव जमाने की कोशिश में है।

काशः! हो ही जाती निष्पक्ष जांच

पूरे एरिया में जनचर्चा है कि शहडोल जिले के सर्वमान्य और लोकप्रिय नेता व समाजसेवी पं.किशोरीलाल चतुर्वेदी के खिलाफ साजिश के तहत की गई कार्रवाई की यदि निष्पक्ष जांच हो जाती तो न केवल बहुत बड़ा खुलासा होता बल्कि शासन-प्रशासन में मुख्यमंत्री के निर्देशो की आड़ किस तरह की बदले की कार्रवाई की जा रही है उसको लेकर भी सच्चाई से खुद प्रदेश के मुखिया अवगत होते। इसके अलावा मुख्यमंत्री के फरमान के नाम पर बदलापुर की कार्रवाई का नया खेल भी रूकता और निर्देश पर कार्रवाई का खुलासा होने के साथ ही दोषीजनों के पाकसाफ बच जाने का भी नया तरीका बे-पर्दा होता। काश प्रदेश के मुख्यमंत्री इसी एक मामले की जांच कराये तो उनके आदेश के नाम पर किये जा रहे सच भी उजागर हो पाते।

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